Monday, October 27, 2008

ब्‍लाॅग लेखन व उसकी पठनीयता

वर्तमान में कई धूरंधर लेखक अपने नये तेवर के साथ ब्‍लॉग लेखन में सामने आ रहे है. इसमें सिनेमा जगत के नामचीन है तो साहित्‍य व खेल जगत के मशहूर ओ मारूफ व्‍यक्ति भी. पत्रकारिता जगत के सदस्‍य तो वैसे भी लि खने में लगे ही थे ब्‍लॉग ने उन्‍हें एक नया मंच प्रदान किया है. आज मैने कई ऐसे ब्‍लॉग को देखा जिन्‍हें देखते ही रह गया. बडी ही सुलझी व साफ सुथरी विचारों से युक्‍त ये अपने आप को दूनिया के बीच प्रस्‍तुत करते है. शायद ब्‍लॉग न होता तो उनके विचार मीडिया के अन्‍य स्रोतों से आने में वर्षो लग जाते. छोटे छोटे शहरों से लोग ब्‍लॉग लि ख रहे है, उनकी भावनाएं उभर कर सामने आ रही है. ये सब संभाल कर रखे जाने योग्‍य है. कुछ नये पुराने ब्‍लॉगों में बी अडडा, हासिया, छाया, मनोवेद इत्‍यादि अच्‍छे प्रभाव बि खेर रहे है. इन्‍हें पाठकों का भरपुर सहयोग मिल रहा है. ब्‍लॉग डायरी के शुरू करने का मकसद बस इतना भर है कि विभिन्‍न ब्‍लॉगों को देखते वक्‍त उनके लेखन पर टिप्‍पणी करने का अवसर तो मौजूद होता है किंतू समान विचारो वाले ब्‍लॉगों पर एक साथ टिप्‍पणी करनी मुश्किल होती है. आइए हम सब ब्‍लॉग लेखन के लिए अपने अनुभव को इस डायरी में दर्ज करें. यह डायरी बिल्‍कूल ही पारदर्शी होगी. किसी भी ब्‍लॉग पर गढे जा रहे विचारों को बिना लाग लपेट के रखा जा सकता है. किसी भी ब्‍लॉग पर चूटकी ली जा सकती है. ब्‍लॉग लेखन को एक नये संतूलित मार्ग व अवसर उपलब्‍ध कराये जा सकते है. यह सब तक संभव नही जबतक आप सबों का सहयोग न मिले. यह बिल्‍कूल वैसा ही जैसे कि खाने में चटनी जो जायका तो बढायेगी ही, स्‍वास्‍थ्‍य को भी ठीक रखेंगी.

Saturday, October 25, 2008

हमसफर

सड़क पर चलते हुए कई बार अनायास आकाश की ओर देखने को जी मचलता है,कितने दिन हुए जीभरकर उसे निहारे हुए, आज तो सिर्फ यही करना है.उसे महसूस करना है जो हरपल हमारे साथ है .इस रहगुजर के हमराही आप भी बन सकते है.तो चले एक कदम आगे.............